Devil’s little workshop with self-destruction

Little brother was sitting idle for a long time. Do not remember for how long though. He was there just like a dead. He did not know that his big brother has a new reason to pump around more blood into the system. A joyful reason of love.

But somehow that blood was not making any interest for the little one. He was tired because of the recent past and its unpleasant continuation. He just wanted to sit idle and take the rest.

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दो किनारें (Two Seashores)

हवा गुंज रही है ऐसे,
गुनगुना रही है कुछ पंक्तियाँ।
फैल रही है ऐसे,
कह रही है कुछ कहानियाँ।

किरणें उड़ रहे हैं ऐसे,
जैसे आखों ने किये हो इशारें।
इशारों पर नाचति आखें,
जैसे समुंदर के दो किनारें।

मत लिखना और नाम इस रेत पर,
खींचति है वह लहरे किनारे।
मिटते नहि यह नाम पल भर,
जब तक किनारे ना भीग जाये पूरे।

छा गये बादल काले काले से,
तेज़ हवा है भीगि भीगि।
बिजली गरजति है तोड के,
लहरें बनती है ऊँचि ऊँचि।

गिरती बूंदों के धार से,
भीगते है किनारे, भीगता है नज़ारा।
एक एक कण भीगि रेत कि,
मांगती है एक हाथ का सहारा।

आसमाँ उजला, किनारे उजले,
उगते सूरज के किरणों से।
चम चमाते दो मोति उगले,
तितली के पंखों जैसे।

हवा गुंज रही है ऐसे,
गुनगुना रही है कुछ नयी पंक्तियाँ।
फैल रही है ऐसे,
कह रही है कुछ नयी कहानियाँ।

Originally posted at my old blog in March, 2014